भारतीय नौसेना को मिली दूसरी महिला हेलिकॉप्टर पायलट: सब लेफ्टिनेंट सिद्धि हेमंत दुबे ने रचा इतिहास
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9 जून 2025, भारतीय नौसेना के लिए गौरव का दिन बन गया, जब सब लेफ्टिनेंट सिद्धि हेमंत दुबे को गोल्डन विंग्स से सम्मानित किया गया और वे भारतीय नौसेना की दूसरी महिला हेलिकॉप्टर पायलट बनीं। यह न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि सिद्धि की लगन, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल भी है।
बचपन का सपना, देश सेवा का जज़्बा
सिद्धि दुबे का पायलट बनने का सपना बचपन से ही उनके दिल में था। एक वायुसेना परिवार में जन्मी, उनके पिता भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ गैर-कमीशन अधिकारी हैं। वर्दी, उड़ान और अनुशासन के माहौल में पली-बढ़ी सिद्धि ने बहुत कम उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें आसमान में उड़ना है — लेकिन उन्होंने चुना एक अलग रास्ता: भारतीय नौसेना की एविएशन शाखा।
“पायलट बनना मेरा बचपन का सपना था। कुछ अलग करने की चाह ने मुझे नौसेना में एविएशन चुनने के लिए प्रेरित किया,” - सब लेफ्टिनेंट सिद्धि दुबे
विंग्स की उड़ान
INS राजाली स्थित हेलिकॉप्टर ट्रेनिंग स्कूल में कठोर 22 सप्ताह की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, सिद्धि को भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रन 561 में शामिल किया गया—जो नौसेना का सबसे बड़ा हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन है। उन्होंने 17 अन्य अधिकारियों के साथ उड़ान और ग्राउंड ट्रेनिंग ली, जिसमें खोज और बचाव, समुद्री निगरानी, और युद्ध स्थितियों में कार्य करने जैसे प्रशिक्षण शामिल थे।
उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को पूर्वी नौसेना कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर ने सराहा और उन्हें "गोल्डन विंग्स" पहनाए।
"यह पंख केवल सजावट नहीं हैं, यह जिम्मेदारी और उत्कृष्टता की निरंतर खोज का प्रतीक हैं।"
एक प्रेरणादायक परंपरा की वाहक
सिद्धि दुबे उस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं जिसकी शुरुआत सब लेफ्टिनेंट अनामिका बी. राजीव ने 2024 में की थी—जो भारतीय नौसेना की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट बनी थीं। इससे पहले लेफ्टिनेंट शिवांगी, शुभांगी स्वरूप और दिव्या शर्मा जैसे नामों ने नौसेना में फिक्स्ड-विंग विमानों का संचालन कर महिलाओं की उपस्थिति दर्ज कराई थी। लेकिन अब सिद्धि और अनामिका जैसे अधिकारी रोटरी-विंग एविएशन में नया अध्याय लिख रहे हैं।
देश की सुरक्षा में नई जिम्मेदारियाँ
अब जब सिद्धि एक ऑपरेशनल पायलट बन चुकी हैं, वे नौसेना के अग्रिम मोर्चों पर तैनात होंगी। वे भारतीय नौसेना के आधुनिक हेलिकॉप्टर जैसे सी किंग, ALH ध्रुव, चेतक, और MH-60R सीहॉक का संचालन करेंगी। उनके मिशनों में शामिल होंगे:
समुद्री निगरानी व गश्त
खोज और बचाव (SAR)
समुद्री डकैती विरोधी अभियान
मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)
एक प्रतीक, एक प्रेरणा
सिद्धि की यह उपलब्धि महज एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, यह एक समाज में बदलाव के प्रतीक के रूप में देखी जा रही है। वह इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि:
सपनों को अनुशासन और मेहनत से साकार किया जा सकता है
महिलाएं किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हैं
भारतीय नौसेना समानता और समावेशन को लेकर गंभीर है
अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सब लेफ्टिनेंट सिद्धि दुबे उन हजारों लड़कियों के लिए मिसाल हैं जो बड़े सपने देखती हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि:
"आसमान कभी मंज़िल नहीं होता, वह तो सिर्फ़ शुरुआत है।"
वे अब न केवल देश के लिए उड़ान भरेंगी, बल्कि उन उम्मीदों और विश्वासों को भी साथ लेकर चलेंगी, जो भारत अपनी बेटियों से करता है।
जय हिंद।

