"नो बैग डे": नई शिक्षा नीति 2020 में छात्रों के लिए सीखने का एक रचनात्मक और तनावमुक्त उपाय
नई दिल्ली।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शिक्षा प्रणाली में कई क्रांतिकारी बदलाव लाए जा रहे हैं, जिनमें से एक प्रमुख पहल है "नो बैग डे" (No Bag Day) — एक ऐसा दिन जब छात्र स्कूल में बिना किताबों और बस्ते के आते हैं। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा को अधिक रुचिकर, व्यावहारिक, रचनात्मक और तनावमुक्त बनाना है।
क्या है "नो बैग डे"?
"नो बैग डे" ऐसा दिन होता है जब विद्यार्थियों को परंपरागत किताबों और कॉपियों से हटकर अनुभव आधारित सीखने, व्यावसायिक कौशल, और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है। इस दिन कक्षाओं में केवल पढ़ाई नहीं होती, बल्कि छात्र फील्ड विज़िट, कला, हस्तशिल्प, खेल, संगीत, और सामुदायिक सहभागिता जैसे कार्यों में शामिल होते हैं।
NEP 2020 के तहत "नो बैग डे" से जुड़े प्रमुख प्रावधान:
🔹 बस्ता रहित अवधि (कक्षा 6-8):
कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए हर वर्ष 10 दिन की 'बस्ता रहित अवधि' निर्धारित की गई है, जिसमें वे बढ़ई, माली, कुम्हार, कलाकार आदि जैसे स्थानीय कारीगरों के साथ इंटर्नशिप करेंगे।
🔹 व्यावसायिक अनुभव (कक्षा 6-12):
इस पहल का विस्तार कक्षा 12 तक किया जा सकता है, जिसमें गर्मी या सर्दी की छुट्टियों के दौरान इंटर्नशिप शामिल होगी ताकि छात्रों को करियर विकल्पों की शुरुआती समझ मिल सके।
🔹 प्रशिक्षण आधारित पाठ्यक्रम:
NCERT द्वारा हाथों से सीखने पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिससे रट्टा प्रणाली से हटकर समझ और व्यावहारिक ज्ञान पर फोकस किया जा सके।
🔹 वर्ष भर 'नो बैग डे' आयोजन:
विद्यालयों को पूरे शैक्षणिक वर्ष में समय-समय पर "नो बैग डे" आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसमें खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, और स्थानीय शिल्प सिखाने जैसी गतिविधियाँ होंगी।
🔹 फील्ड विज़िट और सांस्कृतिक जुड़ाव:
छात्रों को संग्रहालय, ऐतिहासिक स्थलों, विज्ञान केंद्रों जैसी जगहों पर ले जाया जाएगा ताकि उनकी कक्षा की शिक्षा को वास्तविक दुनिया से जोड़ा जा सके।
🔹 स्कूल बैग का भार कम करना:
NCERT, SCERT और स्कूलों को मिलकर पाठ्यचर्या और शिक्षण पद्धति में सुधार करना होगा ताकि स्कूल बैग का वजन कम हो और छात्रों पर मानसिक व शारीरिक बोझ भी घटे।
राज्यों में "नो बैग डे" की पहल:
भारत के कई राज्यों में इस नीति को लागू किया जा रहा है या तैयारी की जा रही है:
दिल्ली: सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक हर साल 10 "नो बैग डे" अनिवार्य किए गए हैं।
मध्य प्रदेश: हर माह एक दिन "नो बैग डे" रखा गया है, जिसमें प्रायोगिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश: हर शनिवार को "नो स्कूल बैग डे" के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें बच्चों की रचनात्मकता और शिक्षक-छात्र संबंधों पर ध्यान दिया जाता है।
राजस्थान: सरकारी स्कूलों में शनिवार को "नो बैग डे" घोषित किया गया है, जिसमें नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य, साहित्य, खेल और कला जैसी गतिविधियाँ कराई जाती हैं।
मणिपुर: कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए शनिवार को "नो स्कूल बैग डे" अनिवार्य है।
अन्य राज्य: महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर सहित कई अन्य राज्य भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं।
कक्षा से बाहर की रचनात्मकता: एक उत्सव का रूप
कुछ स्कूलों और कॉलेजों ने इस दिन को केवल पढ़ाई से छुट्टी नहीं, बल्कि रचनात्मक उत्सव के रूप में मनाना शुरू कर दिया है। चेन्नई के एक कॉलेज में छात्रों ने अपने स्कूल बैग की जगह कुकर, बाल्टी और सूटकेस लेकर आकर अनोखे अंदाज़ में इस दिन को मनाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षा सिर्फ पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
"नो बैग डे" क्यों है महत्वपूर्ण?
बच्चों पर शारीरिक और मानसिक बोझ कम करता है
शिक्षा को व्यावहारिक और जीवन उपयोगी बनाता है
छात्रों की रचनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता और संवाद कौशल को बढ़ाता है
विद्यार्थियों को स्थानीय शिल्प और समुदाय से जोड़ता है
शिक्षा को रूचिकर और वास्तविक जीवन से जुड़ा बनाता है
निष्कर्ष:
"नो बैग डे" सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। यह छात्रों को न सिर्फ आराम और आनंद देता है, बल्कि उन्हें जीवन के लिए बेहतर ढंग से तैयार करता है। अगर इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह आने वाले वर्षों में भारतीय शिक्षा प्रणाली की दिशा ही बदल सकता है।
