एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसा: क्या यह जानबूझकर किया गया क्रैश था? विशेषज्ञ की चौंकाने वाली आशंका
एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट जो आपके प्रतियोगी से अधिक गहराई, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी से भरपूर है
नई दिल्ली।
12 जून को हुए एयर इंडिया फ्लाइट 171 के भीषण हादसे के बाद एक नई बहस ने जन्म ले लिया है। विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व पायलट कैप्टन मोहन रंगनाथन ने यह दावा किया है कि यह दुर्घटना महज तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया मानव हस्तक्षेप भी हो सकता है। उनका कहना है कि ईंधन नियंत्रण स्विच और कॉकपिट रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि यह हादसा एक पायलट की जानबूझकर की गई हरकत का नतीजा हो सकता है।
क्या यह मानव-निर्मित त्रासदी थी?
कैप्टन रंगनाथन का कहना है कि विमान के दोनों इंजन एक साथ बंद होना किसी भी ऑटोमैटिक या सॉफ्टवेयर गड़बड़ी से संभव नहीं। उन्होंने NDTV से बातचीत में स्पष्ट कहा,
"इसे मैन्युअली करना पड़ता है। ये स्विच स्लाइडिंग टाइप नहीं होते जिन्हें गलती से छुआ जा सके। उन्हें उठाकर विशेष दिशा में ले जाना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि इसे जानबूझकर बंद किया गया।"
हादसे की समयरेखा और रहस्यमयी बटन बंद करना
जैसे ही फ्लाइट 171 ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी, मात्र 32 सेकंड में विमान ने ऊंचाई खो दी और 1.2 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित एक मेडिकल हॉस्टल पर जाकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 241 लोगों की मौत हुई, जिनमें 19 ज़मीन पर मौजूद लोग भी शामिल थे। केवल एक व्यक्ति — 11A सीट पर बैठा एक ब्रिटिश नागरिक — इस दुर्घटना में जीवित बचा।
AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया कि दोनों ईंधन नियंत्रण स्विच एक-दूसरे के ठीक एक सेकंड के भीतर ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ मोड में बदले गए। ये स्विच गार्ड रेल से सुरक्षित होते हैं और उन्हें बदलना आसान नहीं होता।
कॉकपिट से आई खौफनाक आवाज़ें
रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में एक पायलट की आवाज़ आती है:
“तुमने ऐसा क्यों किया?”
दूसरा जवाब देता है:
“मैंने नहीं किया।”
कैप्टन रंगनाथन इसे ‘कवर-अप’ का संकेत मानते हैं।
उनका कहना है कि पायलट फ्लाइंग — जो इस मामले में फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर थे — के दोनों हाथ टेक-ऑफ के दौरान नियंत्रण पर होते हैं, जबकि कैप्टन सुमीत सभरवाल, पायलट मॉनिटरिंग, के हाथ फ्री होते हैं। ऐसे में सिर्फ वही व्यक्ति स्विच बंद कर सकता था।
मानसिक स्वास्थ्य का सवाल
रंगनाथन के मुताबिक कई पायलटों ने उन्हें बताया कि विमान के एक पायलट की मेडिकल हिस्ट्री संदिग्ध थी और वह लंबे समय से छुट्टी पर थे।
“अगर शीर्ष प्रबंधन को इस बारे में जानकारी नहीं थी, तो यह और भी बड़ी लापरवाही है,” उन्होंने कहा।
वह मांग करते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहारिक मूल्यांकन को पायलटों की नियमित जांच का हिस्सा बनाया जाए — जो अब तक भारत की किसी भी एयरलाइन या DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) द्वारा नहीं किया जाता।
क्या इतिहास दोहरा रहा है?
इस तरह की दुर्घटनाएँ दुर्लभ हैं, लेकिन पहले भी देखी गई हैं:
Germanwings 9525 (2015) — पायलट ने जानबूझकर विमान को क्रैश किया
EgyptAir 990 (1999)
SilkAir 185 (1997)
China Eastern 5735 (2022)
Malaysia Airlines MH370 (2014) — अब भी रहस्य बना हुआ है
रंगनाथन ने कहा,
“जब कोई मानसिक तनाव और अवसाद से गुजरता है, तब ऐसे निर्णय संभव हैं। हम पहले भी चेतावनी देते रहे हैं, लेकिन किसी ने सुना नहीं।”
नागर विमानन मंत्री की संयमित प्रतिक्रिया
नागर विमानन मंत्री श्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने कहा कि AAIB की रिपोर्ट अभी प्रारंभिक है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।
“हमारे पास दुनिया के सबसे सक्षम पायलट और क्रू हैं। हम उनके कल्याण की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। इस समय जल्दबाज़ी में कोई निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा,” उन्होंने कहा।
निष्कर्ष: यह सिर्फ एक हादसा नहीं, एक चेतावनी है
एयर इंडिया फ्लाइट 171 की यह दुखद दुर्घटना केवल एक तकनीकी फेल्योर नहीं, बल्कि भारत की नागरिक उड्डयन प्रणाली में गहरे बैठे मुद्दों की ओर इशारा करती है — चाहे वह मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी हो, या फिर पायलट थकावट के नियमों की लापरवाही। यदि यह हादसा सच में जानबूझकर किया गया हो, तो यह केवल एक विमान नहीं, पूरी व्यवस्था का पतन है।
