"समुद्र से सामरिक शक्ति तक: अंडमान-निकोबार का विकास मॉडल"

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह: पर्यटन से सामरिक शक्ति तक की नई उड़ान

नई दिल्ली/पोर्ट ब्लेयर।

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह फिर आराम करने का स्थल और समुद्र रोमांस का केंद्र नहीं।बल्कि देश की सामरिक शक्ति और आर्थिक प्रगति का उभरता प्रतीक बनता जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल डी.के. जोशी ने बताया कि वर्ष 2024 के तुलना में इस वर्ष द्वीपसमूह में घरेलू पर्यटकों की संख्या में 41% और विदेशी पर्यटकों की संख्या में 27% की उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। यह सर्वाधिक पर्यटक आगमन है।

नए आयाम

प्रशासन ने अपेक्षित वर्षों के लिए पर्यटन को नए आयाम देने की योजना बनाई है।

  • कई द्वीपों पर लक्ज़री रिसॉर्ट्स और ईको-टूरिज़्म प्रोजेक्ट्स विकसित किए जा रहे हैं।
  • सीप्लेन सेवाएं UDAN-5.5 योजना के तहत जल्द शुरू होंगी, जिससे द्वीपों के बीच तेज़ और किफायती यात्रा संभव होगी।
  • सितंबर तक तीन नए वॉटर एयरोड्रोम बनकर तैयार हो जाएंगे, जिससे देश-विदेश से जुड़ाव और भी सुगम होगा।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

अंडमान-निकोबार को भारत का "स्ट्रैटेजिक हब" बनाने पर अधिका जोर दिया जा रहा है क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति के लिए।

  • प्रशासन ने विमानन टरबाइन ईंधन पर वैट कर की छूट प्रदान की है ताकि अंतरराष्ट्रीय उड़ान को आकर्षित किया जा सके।
  • अब तक 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आईडीए परियोजनाओं में किए जा चुके हैं।
  • ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट इस विकास यात्रा का सबसे बड़ा मील का पत्थर है, जिसमें बंदरगाह, एयरपोर्ट और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर सम्मिलित हैं।

सतत विकास की ओर

प्रशासन का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं अपितु पर्यावरणीय संतुलन भी है।

  • वर्ष 2029 तक 100% नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है।
  • सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है।
  • कोरल रीफ्स और समुद्री जैव विविधता की बचाव के लिए कड़े पर्यावरणीय नीतियां लागू की गई हैं।

स्थानीय लोगों के लिए अवसर

यह परिवर्तन निवेश या पर्यटन तक ही सीमित नहीं है।

  • हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और समुद्री सेवाओं में नए रोजगार स्थानीय युवाओं के लिए खुल रहे हैं।
पारंपरिक हस्तशिल्प और द्वीप-विशेष उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की योजना है।

विश्लेषण:

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह अब पर्यटन, निवेश, पर्यावरण और सामरिक दृष्टिकोण के सभी क्षेत्रों में एक बहुआयामी शक्ति केंद्र के रूप में उभरकर आया है। यदि प्रशासन अपने नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास के लक्ष्यों को समय पर पूरा कर लेता है, तो यह क्षेत्र एशिया-प्रशांत में भारत की आर्थिक और रणनीतिक भूमिका को और मज़बूत करेगा।

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