नीरव मोदी के भाई नेहाल की अमेरिका में गिरफ्तारी, 17 जुलाई को प्रत्यर्पण-सुनवाई
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, 5 जुलाई 2025
पंजाब नैशनल बैंक (PNB) के 13,500 करोड़ रुपये वाले घोटाले में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। भगोड़े व्यापारी नीरव मोदी के छोटे भाई नेहाल दीपक मोदी (46) को 4 जुलाई की रात अमेरिकी अधिकारियों ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस पर गिरफ्तार कर लिया। यह नोटिस केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आग्रह पर जारी हुआ था।
रेड कॉर्नर नोटिस से लेकर हथकड़ी तक
नेहाल ने नोटिस को अमेरिकी अदालतों में चुनौती दी थी, लेकिन आखिरकार उसकी अपील खारिज हो गयी।
गिरफ्तारी के बाद उसे न्यूयॉर्क की संघीय हिरासत में रखा गया है; 17 जुलाई को प्रत्यर्पण पर प्रारम्भिक सुनवाई तय है। अमेरिकी अभियोजन पक्ष पहले ही ज़मानत का विरोध करने का संकेत दे चुका है।
किस मामले में फंसे हैं नेहाल?
1. सबूत नष्ट करना व गवाहों को धमकाना – भारतीय एजेंसियों के अनुसार, जनवरी 2018 में घोटाला उजागर होने के बाद नेहाल ने नीरव की मदद से हार्ड-ड्राइव्स और ई-मेल चैट मिटाने का प्रयास किया।
2. मनी-लॉन्ड्रिंग – जांच बताती है कि घोटाले से निकली काली कमाई को उन्होंने शेल कंपनियों और विदेशों में फर्जी लेन-देन के जरिये इधर-उधर घुमाया।
पहले से ही सजायाफ्ता
यह पहली बार नहीं कि नेहाल अमेरिकी सलाखों के पीछे पहुंचे हों। न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में उन्हें 1-डिग्री ग्रैंड लार्सेनी (हीरा धोखाधड़ी) का दोषी पाते हुए 3–9 साल कैद सुनायी थी, जिसमें वे अब तक सजा काट रहे थे।
घोटाले की टाइमलाइन
वर्ष/तारीख घटना
2011-17 PNB की मुंबई ब्रैडी हाउस शाखा से कई फ़र्ज़ी एलओयू जारी, नीरव मोदी-मेहुल चोकसी समूह को फायदा
जनवरी 2018 बैंक ने 11,400 करोड़ रुपये की अनियमितता रिपोर्ट की; नीरव, चोकसी व नेहाल देश छोड़कर भागे
मार्च 2019 नीरव मोदी लंदन में गिरफ्तार; अभी भी वैंड्सवर्थ जेल में प्रत्यर्पण के विरुद्ध गोपनीय अपील लंबित
जुलाई 2022 नेहाल मोदी हीरा धोखाधड़ी केस में 3–9 साल की सजा
4 जुलाई 2025 अमेरिका में नेहाल की गिरफ्तारी; इंटरपोल RCN पर कार्रवाई
17 जुलाई 2025 प्रत्यर्पण पर पहली सुनवाई (निर्धारित)
आगे की कानूनी राह
प्रत्यर्पण सुनवाई – अमेरिकी अदालत यह देखेगी कि भारत व अमेरिका के बीच 1997 के प्रत्यर्पण समझौते की शर्तें पूरी होती हैं या नहीं।
दोहरे अपराध का सिद्धांत – भारत में लगे आरोप (धोखाधड़ी, मनी-लॉन्ड्रिंग) अमेरिका में भी अपराध माने जाते हैं; इससे प्रत्यर्पण की संभावना मजबूत होती है।
सजा-भोग के समायोजन – यदि प्रत्यर्पण मंजूर हुआ तो भारत में सज़ा तय करते समय अमेरिकी जेल में काटी अवधि घटायी जा सकती है।
भारत के लिए क्या मायने?
1. जांच का पूरा चित्र – एजेंसियां मानती हैं कि नेहाल के बयान से घोटाले के ‘मनी ट्रेल’ और गवाह-धमकाने की साजिश पर पुख्ता सबूत मिल सकते हैं।
2. आस्तियां जब्त करने में मदद – नेहाल ने जिन शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया, उनकी डिटेल मिलते ही विदेशों में फंसे सैकड़ों करोड़ की संपत्ति कुर्क करना आसान होगा।
3. संदेश – विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे मामलों में लंबी कानूनी लड़ाइयों के बीच यह गिरफ्तारी सरकार की ‘जीरो टॉलरेन्स’ नीति का संकेत देती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
“नेहाल की स्वैच्छिक या आदेशित वापसी जांच को चौतरफा मजबूती देगी। भारत को सबूत जुटाने, गवाहों की सुरक्षा और रिकवरी फ़ंड का रास्ता साफ़ दिखाई देता है,”
निष्कर्ष
नेहाल मोदी की गिरफ्तारी से PNB घोटाले के अंतरराष्ट्रीय पेच सुलझने की उम्मीद जगी है। अब निगाहें 17 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं—जहां यह साफ़ होगा कि क्या यह भगोड़ा भाई जल्द ही भारतीय अदालत के कटघरे में खड़ा होगा या फिर लंबी कानूनी जंग आगे बढ़ेगी।
