"Did India Really Gift ‘Coco Island’ to Myanmar? The Untold Truth Behind the Mysterious Island"

क्या भारत ने म्यांमार को ‘कोको द्वीप’ उपहार में दिया था? जानिए इस रहस्यमयी टापू की असली कहानी


भारत और म्यांमार के बीच बंगाल की खाड़ी में बसे ‘कोको द्वीप’ (Coco Islands) को लेकर एक दावा दशकों से चर्चा में रहा है — क्या सच में भारत ने ये द्वीप म्यांमार को “गिफ्ट” कर दिया था? सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है। आइए जानते हैं इस रहस्य की असल सच्चाई।

🏝️ कहानी की शुरुआत: ब्रिटिश राज के दौर से


‘कोको द्वीप’ बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित एक छोटा द्वीप समूह है, जो अंडमान द्वीपों से करीब 150-200 किलोमीटर उत्तर और म्यांमार के रखाइन राज्य से लगभग 400 किलोमीटर पश्चिम की दूरी पर है।


ब्रिटिश शासन के समय, इन द्वीपों का प्रशासनिक नियंत्रण कई बार बदला गया। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में, ब्रिटिश सरकार ने इन्हें ब्रिटिश बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के प्रशासन के तहत कर दिया था। उस समय यह क्षेत्र भारत के अधीन नहीं था।


इसलिए जब 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तब ‘कोको द्वीप’ पहले से ही ब्रिटिश बर्मा के हिस्से में था। यानी भारत के पास कोई अधिकार था ही नहीं जिसे वह “उपहार” के रूप में दे सके।

👉 नतीजा: भारत ने कोई द्वीप म्यांमार को “गिफ्ट” नहीं किया — यह सिर्फ एक पुरानी अफवाह है।


🌏 कोको द्वीप: रहस्य से घिरा सुंदर टापू


भौगोलिक रूप से यह द्वीप भारत के अंडमान द्वीपों के बेहद करीब है — मात्र 55 किलोमीटर की दूरी पर। लेकिन चूंकि यह अब म्यांमार का हिस्सा है, इसलिए किसी भारतीय नागरिक या पर्यटक के लिए यहां पहुंचना संभव नहीं है।


म्यांमार सरकार ने इन द्वीपों पर नागरिक पहुंच और पर्यटन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। यहां न तो होटल हैं, न डाइविंग साइट्स, और न ही पर्यटकों के लिए कोई क्रूज़ यात्रा की अनुमति है। यहां तक कि हवाई फोटोग्राफी भी प्रतिबंधित है।


इस वजह से यह द्वीप समूह आम पर्यटकों के लिए “नक्शे पर मौजूद रहस्य” बन गया है — जो अंडमान से दिखाई तो देता है, पर पहुंच से बाहर है।


🇮🇳 अंडमान से जुड़ा दिलचस्प तथ्य


कोको द्वीपों का ज़िक्र आते ही लोग अक्सर इन्हें भारत के अंडमान निकोबार समूह से जोड़ देते हैं। यह भ्रम स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों समुद्र में बेहद करीब हैं।


लेकिन भारत के अंडमान द्वीपों में भी एक ऐसा क्षेत्र है जो उतना ही रहस्यमयी और प्रतिबंधित है — उत्तर सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island)। यहां बाहरी लोगों का प्रवेश सख्ती से मना है। भारत सरकार ने इस द्वीप के चारों ओर 9.3 किलोमीटर का निषिद्ध क्षेत्र (Exclusion Zone) बना रखा है। जो भी व्यक्ति या जहाज़ इस सीमा में घुसने की कोशिश करता है, उसे भारी जुर्माना और 5 साल तक की जेल हो सकती है।


🕵️‍♂️ इतिहास और रहस्य का संगम


कोको द्वीप और उत्तर सेंटिनल द्वीप, दोनों ही इस बात की मिसाल हैं कि आज के तकनीकी युग में भी कुछ स्थान ऐसे हैं जो इतिहास, राजनीति और रहस्य की परतों में लिपटे हुए हैं।


जहां अंडमान समूह में रोमांचक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं कोको द्वीप अब भी मौन जलराशियों में छिपा एक रहस्यमयी टापू बना हुआ है — मानो प्रकृति ने कुछ रहस्य अपने पास ही सुरक्षित रखे हों।


📰 निष्कर्ष: “उपहार” नहीं, इतिहास की उलझन


भारत ने कभी भी कोको द्वीप म्यांमार को “गिफ्ट” नहीं किया। यह केवल औपनिवेशिक युग की प्रशासनिक सीमाओं का परिणाम था, जिसे बाद में लोगों ने मिथक का रूप दे दिया।


यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि हर अफवाह के पीछे एक ऐतिहासिक सच्चाई छिपी होती है, बस ज़रूरत होती है उसे सही तरीके से समझने की।

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