पिता दिवस 2025: जानिए तारीख, इतिहास, महत्व और इस खास दिन को मनाने के खूबसूरत तरीके
पिता दिवस 2025 की तिथि
इस वर्ष पिता दिवस 15 जून 2025 (रविवार) को मनाया जाएगा। यह दिन हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में यह परंपरा निभाई जाती है, जबकि इटली, स्पेन, पुर्तगाल और क्रोएशिया जैसे देशों में इसे 19 मार्च (सेंट जोसेफ दिवस) के दिन मनाया जाता है।
पिता दिवस का इतिहास
पिता दिवस की शुरुआत एक दुखद घटना और गहरे सम्मान से हुई थी। वर्ष 1908 में अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया में एक भीषण कोयला खदान हादसे में 361 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकतर पिता थे। उनके सम्मान में पहली बार पिता दिवस पर एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।
हालांकि इसे वार्षिक परंपरा का रूप नहीं मिला। इसके वर्षों बाद, सोनोरा स्मार्ट डॉड नामक एक महिला ने, जो वॉशिंगटन की रहने वाली थीं, इस दिन को आधिकारिक रूप से मान्यता दिलाने की मुहिम चलाई। वे अपने पिता को सम्मान देना चाहती थीं जिन्होंने एकल अभिभावक बनकर छह बच्चों की परवरिश की थी। 1910 में पहली बार आधिकारिक रूप से 19 जून को फादर्स डे मनाया गया।
पिता दिवस का महत्व
पिता केवल पालन-पोषण नहीं करते, बल्कि वे जीवन मूल्यों, अनुशासन और आत्मबल के शिल्पकार होते हैं। वे अक्सर बिना कहे सब कुछ सहते हैं, बच्चों की हर जरूरत पूरी करते हैं, और कठिन समय में चट्टान की तरह खड़े रहते हैं।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक पिता का प्यार हमेशा मुखर नहीं होता, लेकिन उसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है — कभी सुबह की सैर में साथ चलना, कभी सलाह देना, और कभी बिना कुछ कहे कंधे पर हाथ रखना।
पिता दिवस कैसे मनाएं?
पिता दिवस को खास बनाने के लिए महंगे उपहारों की ज़रूरत नहीं होती, बस समय और स्नेह चाहिए। कुछ ऐसे सरल लेकिन भावनात्मक तरीके हैं:
- उनके साथ कुछ समय बिताएं — चाहे वह फिल्म देखना हो या साथ खाना पकाना।
- कोई किताब, जिसे वे पढ़ना चाहें, उपहार में दें।
- अगर वे फिटनेस पसंद करते हैं, तो जिम सदस्यता या योग कक्षा में साथ जाएं।
- उनके अधूरे कामों में मदद करें — जैसे बगीचे की सफाई या पुरानी चीज़ें ठीक करना।
- एक हाथ से लिखा हुआ नोट या पत्र — जिसमें आपके दिल की बात हो — उनसे बड़ा तोहफा कोई नहीं।
निष्कर्ष:
पिता दिवस सिर्फ एक अवसर नहीं, एक एहसास है — उस खामोश ममता का, जो एक पिता हर दिन बिना किसी दिखावे के निभाता है। इस दिन को यादगार बनाएं, न कि केवल उत्सव के लिए, बल्कि उस छाया के लिए, जो हमेशा सिर पर रहती है — चाहे धूप हो या तूफ़ान।

